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अबोल सेवा - जीवदया रथ

हमारे घरों में, खेतों पर या सार्वजनिक सड़कों पर छोटे वन्य या पालतू पशु - पक्षी को आकस्मिक विज करंट, अन्य जानवरों द्वारा हमले और विभिन्न कारणों से घायल हो जाते हैं। जिनको उचित उपचार प्राप्त नहीं होने से उनके घाव लंबे समय तक खुला रहने के कारण उनके शरीर पर स्थायी विकृति हो जाती है या पीड़ा से मर सकते हैं।
ऐसे जानवर या जीव हमारे ध्यान में आते हैं, लेकिन उचित सुविधाओं की कमी के कारण हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं, भले ही हमारे दिल में इनके लिए दया का भाव हो।
वर्तमान में एज्युफन फाउंडेशन ट्रस्ट संस्था की टीम घायल जानवरों जैसे बंदर, नीलगाय, खरगोश, कुत्ते, बिल्ली और पक्षियों जैसे मोर, कबूतर, तोते, बतख आदि को रेस्क्यू कर रही है और उन्हें उचित उपचार दे रही है और सर्जरी के लिए पशु चिकित्सालय या पांजारापोल में निजी वाहन मे ले जाते है वहा पर डॉक्टर द्वारा सर्जरी और उचित उपचार के बाद, उसे चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया है और अधिकांश जानवरों को जीवनदान मिला है।
ऐसे घायल वन्य जानवरों और पक्षियों की ज्यादा कोल आ रहे है और धानेरा के आसपास के करीबन 100 गांव में ऐसे किसी भी कारण से अबोल जीव मरे नहीं और समय पर उचित उपचार प्राप्त हो ऐसे उद्देश्य के साथ घायल मूक पशुओं के लिए एक सुविधाजनक "जीवदया रथ" - अबोल जीवसेवा शुरू कर रहे है। जिसमें आपका सहयोग अपेक्षित है।

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जीवदया रथ को आर्थिक सहायता देकर इन मुंगे जानवरों और पक्षियों की सेवा में भाग लें।

1) मुख्य भाग्यशाली दाता: 5 लाख सहयोग (10 साल के लिए जीवदया रथ के मुख्य भाग पर फोटो और नाम)

2) निभावखर्च के मुख्य दाता: 2 लाख सहयोग (10 साल के लिए जीवदया रथ पर फोटो और नाम)

3) वार्षिक निभावखर्च के दाता: 15 हजार योगदान (एक वर्ष के लिए जीवदया रथ पर नाम)

4) एक घायल अबोल जीव का प्राथमिक उपचार: रु 1100 / - सहयोग (संगठन के सोशल मीडिया में नाम और फोटो)

नोंध: यदि फोटो या नाम किसी कारण से क्षतिग्रस्त होता है या किसी भी कारण से रंग फीका होता है, तो फोटो या नाम हर साल फिर से नया लगाया जाएगा।